हाजीपुर में ओवरलोड हाइवा पर बवाल: जब्त वाहन लेकर फरार होने का आरोप, सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने पर एफआईआर दर्ज
ओवरलोडिंग से शुरू हुआ मामला, अब सरकारी कार्रवाई में हस्तक्षेप तक पहुंची जांच
वैशाली जिले के हाजीपुर में ओवरलोड हाइवा को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन और अवैध ओवरलोडिंग के नेटवर्क पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआत एक ओवरलोड वाहन की जांच से हुई, लेकिन मामला धीरे-धीरे सरकारी कार्य में बाधा, जब्त वाहन को छुड़ाने की कथित साजिश, अधिकारियों को धमकी देने और सरकारी आदेश की अवहेलना तक पहुंच गया। इस पूरे मामले में परिवहन विभाग की ओर से औद्योगिक थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई है और पुलिस जांच में जुट गई है।
जांच अभियान के दौरान पकड़ा गया हाइवा
जानकारी के अनुसार, परिवहन विभाग की टीम हाजीपुर क्षेत्र में नियमित जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान छाई लदे एक हाइवा को रोककर दस्तावेजों और भार की जांच की गई। जांच में वाहन का टैक्स भी वैध नहीं पाया गया। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने वाहन को बूबना धर्मकांटा ले जाकर उसका वजन कराया।
तौल के दौरान वाहन निर्धारित क्षमता से करीब 6 टन अधिक लदा पाया गया। नियमों के अनुसार इसे ओवरलोड मानते हुए परिवहन विभाग ने वाहन को जब्त कर लिया।
चालक पर बदसलूकी करने का आरोप
परिवहन विभाग का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान वाहन चालक ने मौके पर मौजूद परिवहन दरोगा के साथ अभद्र व्यवहार किया। अधिकारियों के अनुसार चालक ने विभागीय कार्रवाई में सहयोग करने के बजाय विवाद खड़ा करने की कोशिश की।
हालांकि इस आरोप पर चालक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
परिवहन कार्यालय में खड़ा कराया गया जब्त वाहन
ओवरलोडिंग की पुष्टि होने के बाद हाइवा को परिवहन कार्यालय के समीप खड़ा कराया गया। वाहन की चाबी जब्त कर विभागीय कार्यालय में जमा कर दी गई ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
यहीं से पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।
कथित इंट्री माफिया की एंट्री से बढ़ा विवाद
परिवहन विभाग की शिकायत के अनुसार वाहन जब्त होने की सूचना मिलते ही कथित इंट्री माफिया सक्रिय हो गए। आरोप है कि उन्होंने परिवहन अधिकारियों पर वाहन छोड़ने का दबाव बनाया। जब अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए वाहन छोड़ने से इनकार कर दिया, तब कथित तौर पर उन्हें धमकाया भी गया।
विभाग का आरोप है कि इसके बाद बिना किसी विभागीय अनुमति के जब्त हाइवा से छाई नीचे गिरा दी गई। इसके लिए किसी अधिकृत आदेश की अनुमति नहीं ली गई।
दूसरी चाबी से वाहन निकालने का आरोप
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि जब्त वाहन को दूसरी चाबी की मदद से स्टार्ट कर वहां से निकाल लिया गया।
इसके बाद वाहन को दूसरे धर्मकांटा पर ले जाकर दोबारा वजन कराया गया, ताकि वाहन को अंडरलोड दिखाया जा सके। परिवहन विभाग का आरोप है कि ऐसा करके पहले की गई सरकारी कार्रवाई को गलत साबित करने की कोशिश की गई।
इसी दौरान परिवहन दरोगा पर अवैध पैसे मांगने के आरोप भी लगाए गए, जिसे विभाग ने निराधार बताया है।
अहले सुबह जब्त वाहन लेकर फरार होने का आरोप
परिवहन विभाग की लिखित शिकायत के अनुसार 30 जून की सुबह करीब चार बजे कथित इंट्री मैन और वाहन मालिक जब्त हाइवा को लेकर वहां से निकल गए।
घटना की सूचना मिलते ही परिवहन दरोगा ने पीछा किया और गंगा पुल के समीप वाहन को दोबारा पकड़ लिया। इसके बाद वाहन को आगे की कार्रवाई के लिए सदर थाना के हवाले कर दिया गया।
तीन महत्वपूर्ण साक्ष्यों का दावा
परिवहन विभाग का कहना है कि उनके पास मामले से जुड़े तीन महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध हैं।
पहला साक्ष्य – वीडियो फुटेज
बताया गया है कि जब्त हाइवा से छाई नीचे गिराए जाने का वीडियो मौजूद है। विभाग इसे सरकारी कार्रवाई में हस्तक्षेप का अहम प्रमाण मान रहा है।
दूसरा साक्ष्य – चालक का कथित बयान
वाहन दोबारा पकड़े जाने के दौरान चालक ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह धीरज प्रसार के कहने पर वाहन लेकर जा रहा था। विभाग का कहना है कि इस बयान की जांच की जाएगी।
तीसरा साक्ष्य – धर्मकांटा की तौल पर्ची
बूबना धर्मकांटा से जारी वजन पर्ची में वाहन को लगभग छह टन ओवरलोड बताया गया है। विभाग इसे तकनीकी और दस्तावेजी प्रमाण मान रहा है।
धीरज प्रसार और वाहन मालिक के खिलाफ शिकायत
परिवहन दरोगा ने कथित इंट्री मैन धीरज प्रसार तथा वाहन मालिक के खिलाफ औद्योगिक थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, जब्त वाहन हटाने, अधिकारियों को धमकाने और नियमों का उल्लंघन करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।
जांच के केंद्र में कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
- जब्त वाहन तक दूसरी चाबी कैसे पहुंची?
- बिना अनुमति वाहन से छाई किसके निर्देश पर हटाई गई?
- क्या सरकारी कार्रवाई को प्रभावित करने की सुनियोजित कोशिश की गई?
- क्या ओवरलोडिंग से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है?
- यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर कौन-कौन सी धाराओं में कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।
पुलिस और परिवहन विभाग जुटे जांच में
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। वीडियो फुटेज, तौल पर्ची, दस्तावेज और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग का भी कहना है कि यदि सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की सख्ती
वैशाली जिले में लगातार ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि ओवरलोड वाहन न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि सरकारी सड़कों और पुलों को भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
निष्कर्ष
हाजीपुर का यह मामला अब केवल एक ओवरलोड हाइवा का नहीं रह गया है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अनुसार यदि जांच में सरकारी कार्रवाई में हस्तक्षेप, जब्त वाहन को छुड़ाने की कोशिश और अधिकारियों को धमकाने जैसी बातें सही साबित होती हैं, तो यह मामला कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती की बड़ी परीक्षा बन सकता है।
फिलहाल पुलिस और परिवहन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन लोगों की भूमिका सामने आती है। तब तक यह मामला पूरे वैशाली जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
