अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सिविल कोर्ट परिसर हाजीपुर में भव्य समारोह समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 45 महिलाओं को किया गया सम्मानित,

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सिविल कोर्ट परिसर हाजीपुर में भव्य समारोह

समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 45 महिलाओं को किया गया सम्मानित




हाजीपुर, वैशाली:
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को सिविल कोर्ट परिसर हाजीपुर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं की भूमिका, उनके अधिकारों और उनके सशक्तिकरण को लेकर जागरूकता फैलाना तथा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित करना था। समारोह में न्यायिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और महिलाओं के सम्मान तथा उनके अधिकारों पर अपने विचार व्यक्त किए।

संयुक्त रूप से किया गया कार्यक्रम का उद्घाटन

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार वैशाली हर्षित सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद गयासुद्दीन, अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार रितु कुमारी, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदीलाल दास, डॉ. रंजन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सुधीर कुमार शुक्ला ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। इसके बाद उपस्थित अतिथियों ने महिलाओं की भूमिका और समाज में उनके बढ़ते योगदान पर विस्तार से चर्चा की।

महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देना जरूरी: प्रधान न्यायाधीश

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षित सिंह ने कहा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ेंगी, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार प्रदान किए हैं और उनकी सुरक्षा के लिए कई तरह के कानूनी प्रावधान भी बनाए गए हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को इन अधिकारों और योजनाओं की जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

शिक्षा से ही महिलाओं का सशक्तिकरण संभव

कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद गयासुद्दीन ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास और प्रगति के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने विशेष रूप से बच्चियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि यदि लड़कियों को बेहतर शिक्षा मिलेगी तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि आज के समय में महिलाएं शिक्षा, खेल, चिकित्सा, कला, प्रशासन और सामाजिक सेवा जैसे कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। यह समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान

इस समारोह का मुख्य आकर्षण उन महिलाओं और लड़कियों को सम्मानित करना था जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर वैशाली जिले का नाम रोशन किया है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए शहर की जानी-मानी चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. साक्षी को सम्मानित किया गया। खेल के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली अंशा कुमारी को भी सम्मान दिया गया।

इसके अलावा खेल के क्षेत्र में रजनी अलंकार और वैभवी राज सिंह को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।

कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए निशि कुमारी को सम्मानित किया गया, जबकि समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए शालिनी भारती को सम्मान प्रदान किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाली शिक्षिकाओं को भी मिला सम्मान

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए अर्चना कुमारी, विभा कुमारी, नेहा कुमारी और खुशबू कुमारी को सम्मानित किया गया। इन शिक्षिकाओं ने शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने और बच्चों को बेहतर भविष्य देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्काउट एंड गाइड से जुड़ी छात्राओं को भी किया गया सम्मानित

स्काउट एंड गाइड के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने वाली कई छात्राओं को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। इनमें निशि कुमारी, सृष्टि कुमारी, अनुष्का कुमारी, सुहानी कुमारी, इशिका कुमारी, कोमल कुमारी, सलोनी प्रिया, विमला कुमारी और संजू कुमारी शामिल हैं।

इन छात्राओं ने स्काउट एंड गाइड के माध्यम से समाज सेवा और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। समारोह में कुल मिलाकर विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 45 महिलाओं और छात्राओं को सम्मानित किया गया।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम का संचालन करते हुए स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के सचिव सह जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के डायरेक्टर सुधीर कुमार शुक्ला ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा था, जिसका समापन इस समारोह के साथ किया गया।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा आज भी समाज के कई हिस्सों में मौजूद है, जिसे खत्म करने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाएं और समाज को जागरूक करें।

2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य

सुधीर कुमार शुक्ला ने कहा कि सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाया जाए।

इसके लिए समाज में जागरूकता फैलाने, शिक्षा को बढ़ावा देने और कानूनी प्रावधानों के बारे में लोगों को जानकारी देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज की महिलाएं और युवतियां इस दिशा में आगे आएंगी तो निश्चित रूप से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव ऋतु कुमारी ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

बड़ी संख्या में उपस्थित रहे लोग

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अमित कुमार, रंजन कुमार, पारा लीगल वॉलिंटियर संतोष कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना की और उनके सम्मान में तालियों की गूंज से पूरा सभागार गूंज उठा।

समारोह का समापन महिलाओं के सम्मान और उनके सशक्तिकरण के संकल्प के साथ किया गया। यह कार्यक्रम न केवल महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान था बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो समाज और राष्ट्र दोनों प्रगति करते हैं।

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