शिखर पर वैशाली: किसान पंजीकरण महाअभियान में राज्य में प्रथम स्थान
वैशाली समाहरणालय, हाजीपुर | जिला जनसंपर्क
किसान हित में ऐतिहासिक उपलब्धि
बिहार सरकार द्वारा संचालित किसान पंजीकरण महाअभियान का समापन वैशाली जिले में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ हुआ। अभियान के अंतिम दिन 11,332 किसानों का पंजीकरण कर वैशाली ने सम्पूर्ण राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह सफलता केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह उस प्रशासनिक सोच की जीत बनी जिसमें सरकार स्वयं किसानों के द्वार तक पहुँचने के संकल्प के साथ मैदान में उतरी।
यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता, रणनीति और निरंतर परिश्रम के साथ कार्य करता है, तो परिणाम न केवल लक्ष्य से आगे निकलते हैं बल्कि विश्वास की नींव भी मजबूत होती है।
अभियान की यात्रा: उतार-चढ़ाव से शिखर तक
अभियान के दौरान वैशाली जिले की रैंकिंग राज्य स्तर पर शीर्ष पाँच में ऊपर-नीचे होती रही, किंतु अंतिम चरण में जिले ने निर्णायक बढ़त बनाते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि वैशाली ने निरंतरता, सटीक रणनीति और अंतिम क्षणों तक पूर्ण समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया।
अंतिम दिनों में प्रशासनिक टीमों की सक्रियता, फील्ड स्तर पर सघन निगरानी और त्वरित निर्णयों ने अभियान को नई गति दी, जिसका प्रतिफल राज्य में शीर्ष स्थान के रूप में सामने आया।
पंजीकरण से सशक्तिकरण तक: अभियान का उद्देश्य
किसान पंजीकरण महाअभियान को मात्र एक प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर किसान सशक्तिकरण की एक ठोस पहल के रूप में संचालित किया गया। इस महाअभियान को दो चरणों में विभाजित किया गया—
प्रथम चरण (06 जनवरी से 11 जनवरी 2026):
इस चरण में व्यापक जनभागीदारी के साथ अभियान की मजबूत नींव रखी गई। पंचायत स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक शिविरों का आयोजन हुआ। इस चरण में भगवानपुर प्रखंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अग्रणी भूमिका निभाई।
द्वितीय चरण:
दूसरे चरण में अभियान ने और अधिक गति पकड़ी। पंजीकरण की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ शेष वंचित किसानों तक पहुँच पर विशेष ध्यान दिया गया। इस चरण में पातेपुर प्रखंड ने नेतृत्व करते हुए पंजीकरण को नई ऊँचाई दी। दोनों चरणों की संयुक्त ऊर्जा ने इस अभियान को एक प्रभावी जन-आंदोलन में परिवर्तित कर दिया।
आँकड़ों की जुबानी सफलता
महाअभियान के दौरान वैशाली जिले में—
1,42,681 किसान पंजीकरण
2,21,328 e-KYC
2,14,562 PM-Kisan पंजीकरण
पूर्ण किए गए।
इन प्रयासों से जिले में कुल किसान पंजीकरण 66 प्रतिशत तक पहुँचा। ये आँकड़े इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि जिला प्रशासन ने योजनाओं को कागज़ी प्रक्रिया से आगे बढ़ाकर वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचाया।
“कोई किसान छूटे नहीं”: प्रशासन का संकल्प
इस अभियान की आत्मा बना “कोई किसान छूटे नहीं” का स्पष्ट संदेश। वैशाली की जिलाधिकारी श्रीमती वर्षा सिंह (भा.प्र.से.) के नेतृत्व में यह अभियान पंजीकरण से आगे बढ़कर प्रशासन और किसान के बीच विश्वास का सेतु बना।
भौगोलिक कठिनाइयों, सामाजिक उपेक्षा और तकनीकी जटिलताओं के बावजूद प्रशासन ने हर पात्र किसान तक पहुँचने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से महादलित टोलों में विशेष शिविर लगाए गए ताकि योजना स्वयं किसान तक पहुँचे।
मौसम की प्रतिकूलता भी प्रशासन के संकल्प को डिगा न सकी। ठंड के दिनों में अलाव जलाकर किसानों को एकत्र किया गया, ताकि कोई भी किसान अधिकार से वंचित न रहे।
महिलाओं की भागीदारी: अभियान की नई पहचान
इस महाअभियान की सबसे सशक्त कड़ी बनी महिलाओं की भागीदारी। स्वयं जिलाधिकारी के नेतृत्व में महिलाओं को जिला, प्रखंड और फील्ड स्तर पर आगे लाया गया। परिणामस्वरूप फेशियल रिकग्निशन आधारित पंजीकरण को लेकर महिलाओं की झिझक टूटी और बड़ी संख्या में महिला किसान इस अभियान का सक्रिय हिस्सा बनीं।
मैदान में प्रशासन: सुबह से रात तक सेवा
अभियान के दौरान प्रशासनिक टीमें सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक फील्ड में सक्रिय रहीं। नियमित रणनीति बैठकें, फील्ड से सीधा फीडबैक और त्वरित निर्णयों ने यह सुनिश्चित किया कि तकनीकी या सामाजिक—हर अड़चन का समाधान मौके पर ही हो।
तकनीक का प्रभावी उपयोग
अभियान में तकनीक का उपयोग अत्यंत प्रभावी रहा।
IC3 (Integrated Control and Command Centre) के माध्यम से तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया।
व्हाट्सएप आधारित समन्वय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डोर-टू-डोर पंजीकरण, पंचायत भवन, CSC और वसुधा केंद्रों के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया को सरल, तेज़ और भरोसेमंद बनाया गया।
प्रशासन: एक संगठित तंत्र
किसान पंजीकरण महाअभियान के दौरान वैशाली में प्रशासन ने एक संगठित और सक्रिय तंत्र के रूप में कार्य किया। कृषि, राजस्व, प्रखंड स्तर की टीमें, जीविका दीदी, आंगनवाड़ी कर्मी, CSC और वसुधा केंद्र—सभी ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
यह अभियान पदों का नहीं, भूमिकाओं का था, जहाँ हर व्यक्ति ने अपने दायित्व को समझते हुए उसे पूरी निष्ठा से निभाया।
: संवेदनशील शासन की पहचान
किसान पंजीकरण महाअभियान का यह ऐतिहासिक समापन संवेदनशील नेतृत्व, मजबूत प्रशासन और जन-केंद्रित शासन की सशक्त पहचान बन गया है।
जिलाधिकारी श्रीमती वर्षा सिंह के नेतृत्व में वैशाली ने यह सिद्ध कर दिया कि जब प्रशासन संकल्प, संवेदना और रणनीति के साथ ज़मीन पर उतरता है, तो परिणाम केवल आँकड़ों में नहीं बल्कि किसानों के विश्वास और सशक्तिकरण में दिखाई देते हैं।
किसानों के साथ, किसानों के लिए — वैशाली सदैव अग्रणी।
