रामप्रताप सिंह मेमोरियल स्कूल परिसर में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न भारतीय संस्कृति, धर्म और पर्यावरण संरक्षण का दिया गया सशक्त संदेश,

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 रामप्रताप सिंह मेमोरियल स्कूल परिसर में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न

भारतीय संस्कृति, धर्म और पर्यावरण संरक्षण का दिया गया सशक्त संदेश





हरिपुर नगर में संस्कार और राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत आयोजन

आज दिनांक 20 जनवरी 2026 को हरिपुर नगर स्थित रामप्रताप सिंह मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, धर्म, परंपरा और राष्ट्रभाव के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, मातृशक्ति और धर्मस्वालंबी बंधुओं ने भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण अत्यंत प्रेरणादायक, अनुशासित और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण बना रहा।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक प्रवीर जी का मार्गदर्शन

इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक प्रवीर जी का प्रेरक एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन रहा। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली सभ्यता और सनातन धर्म परंपराओं की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति है, जो हजारों वर्षों से अपने मूल्यों और संस्कारों के माध्यम से मानवता का मार्गदर्शन करती आ रही है।

प्रवीर जी ने अपने वक्तव्य में यह भी रेखांकित किया कि भारतीय संस्कृति का आधार धर्म, संस्कार, कर्तव्य और समरसता है। यही मूल्य हमें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराते हैं।


धर्म और संस्कृति: भारतीय समाज की आत्मा

अपने उद्बोधन में प्रवीर जी ने धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न बताते हुए उसे जीवन जीने की पद्धति बताया। उन्होंने कहा कि धर्म हमें सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और त्याग जैसे गुणों से जोड़ता है। भारतीय संस्कृति में निहित ये मूल्य ही समाज को संगठित और सशक्त बनाते हैं।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आज के समय में जब पाश्चात्य प्रभाव के कारण सांस्कृतिक विचलन देखने को मिल रहा है, तब ऐसे आयोजनों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हिंदू सम्मेलन जैसे मंच समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और नई पीढ़ी को संस्कारों से परिचित कराने का कार्य करते हैं।


पर्यावरण संरक्षण का दिया गया सशक्त संदेश

प्रवीर जी ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण को भी धर्म और संस्कृति से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को माता का दर्जा दिया गया है। पेड़, नदी, पर्वत और धरती — सभी को पूजनीय माना गया है। ऐसे में पर्यावरण की रक्षा करना हमारा धार्मिक और नैतिक कर्तव्य है।

उन्होंने उपस्थित जनसमूह को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया और आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर पौधारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाए। यह संदेश कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।


बालिकाओं की ओजस्वी प्रस्तुति ने मोहा मन

कार्यक्रम के दौरान नगर की बालिकाओं रूपाली एवं दीपा ने अपनी प्रभावशाली कविता और ओजस्वी शब्दों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कार और कर्तव्यों का भावपूर्ण बोध कराया। उनकी प्रस्तुति ने न केवल दर्शकों को भावविभोर किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि आज की युवा पीढ़ी भारतीय मूल्यों को समझ रही है और उन्हें आत्मसात करने के लिए तैयार है।

बालिकाओं की प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सही मार्गदर्शन और संस्कार मिलें, तो आने वाली पीढ़ी राष्ट्र और संस्कृति के संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकती है।


मातृशक्ति और धर्मस्वालंबी बंधुओं की सक्रिय सहभागिता

इस हिंदू सम्मेलन में हरिपुर नगर की सैकड़ों माता-बहनों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में उपस्थित धर्मस्वालंबी बंधुओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, समयबद्धता और सामूहिक सहभागिता देखने को मिली, जो ऐसे आयोजनों की सफलता का प्रमुख आधार होती है।


संस्कारयुक्त और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण वातावरण

पूरे सम्मेलन के दौरान वातावरण संस्कारयुक्त, प्रेरणादायक और राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत बना रहा। वक्ताओं के विचार, बालिकाओं की प्रस्तुति और उपस्थित जनसमूह की सहभागिता ने कार्यक्रम को एक विशेष ऊंचाई प्रदान की। यह सम्मेलन न केवल एक आयोजन था, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।


समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हिंदू सम्मेलन

रामप्रताप सिंह मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में आयोजित यह हिंदू सम्मेलन समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में उभरकर सामने आया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति और धर्म आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को जोड़ने की अद्भुत शक्ति रखते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों द्वारा सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया गया।


यह हिंदू सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धर्म, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभाव को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा। प्रांत प्रचारक प्रवीर जी का मार्गदर्शन, बालिकाओं की ओजस्वी प्रस्तुति और जनसहभागिता ने इसे अविस्मरणीय बना दिया। ऐसे आयोजन समाज को जागरूक करने, संस्कारों को सुदृढ़ करने और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने का कार्य करते रहेंगे।

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