UGC के नए कानून के विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की अहम बैठक धरना-प्रदर्शन के आयोजन का लिया गया सर्वसम्मत निर्णय

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UGC के नए कानून के विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की अहम बैठक

धरना-प्रदर्शन के आयोजन का लिया गया सर्वसम्मत निर्णय





।: शिक्षा नीति को लेकर बढ़ती चिंता

देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हालिया UGC के नए कानून को लेकर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और छात्र संगठनों में गहरी चिंता देखी जा रही है। इसी क्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें नए UGC कानून को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक का मुख्य विषय रहा—UGC के नए कानून को सरकार द्वारा वापस लिया जाए, क्योंकि यह कानून शिक्षा की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और सामाजिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।


बैठक का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

इस बैठक का उद्देश्य UGC के नए कानून के संभावित प्रभावों का विश्लेषण करना और इस विषय पर संगठन की स्पष्ट रणनीति तय करना था। महासभा के नेताओं का मानना है कि यह कानून विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वतंत्रता को सीमित करता है तथा शिक्षा को अत्यधिक केंद्रीकरण की ओर ले जाता है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि समय रहते इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव छात्रों, शिक्षकों और समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ेगा।


वरिष्ठ नेताओं और शिक्षाविदों की उपस्थिति

बैठक में संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, शिक्षाविद और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने विचार रखे। प्रमुख रूप से डॉ. दामोदर प्रसाद सिंह, अभिषेक कुमार सिंह (युवा प्रदेश अध्यक्ष), अशोक सिंह, शिवनाथ सिंह, प्रोफेसर रामानंद सिंह, जय नारायण सिंह, रामानंद बाबू, जी. पी. एन. सिंह, कमल सिंह, अजय सिंह, वीरेंद्र सिंह, गणेश सिंह (कोषाध्यक्ष), पंकज सिंह, मनीष सिंह (सचिव), प्रमोद कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह, अखिलेश सिंह कुमार सहित अनेक गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।
इन सभी ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा नीति से जुड़े फैसले व्यापक संवाद और सहमति के आधार पर होने चाहिए।


UGC के नए कानून पर गंभीर आपत्तियां

बैठक में वक्ताओं ने UGC के नए कानून की विभिन्न धाराओं पर गंभीर आपत्तियां जताईं। उनका कहना था कि यह कानून विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करता है और शैक्षणिक संस्थानों को नौकरशाही नियंत्रण के अधीन ला सकता है।
शिक्षाविदों ने यह भी चिंता जताई कि इससे शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम निर्माण और शोध की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यह कानून क्षेत्रीय और सामाजिक विविधताओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखता।


युवा नेतृत्व की सक्रिय भूमिका

बैठक में अभिषेक कुमार सिंह, युवा प्रदेश अध्यक्ष ने विशेष रूप से युवाओं और छात्रों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का सीधा संबंध देश के भविष्य से है और यदि शिक्षा प्रणाली कमजोर होगी तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से इस कानून के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करें।


शिक्षाविदों के विचार: शिक्षा की आत्मा की रक्षा जरूरी

प्रोफेसर रामानंद सिंह सहित अन्य शिक्षाविदों ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्रदान करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समाज को सोचने-समझने की क्षमता देती है। नए UGC कानून से यदि शिक्षा की आत्मा प्रभावित होती है, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह शिक्षकों, छात्रों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर इस कानून में आवश्यक संशोधन करे या इसे पूरी तरह वापस ले।


धरना-प्रदर्शन का सर्वसम्मत निर्णय

विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि UGC के नए कानून के विरोध में धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अनुशासित तरीके से किया जाएगा।
महासभा ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की रक्षा के लिए है।


आंदोलन की रणनीति और आगे की योजना

बैठक में आंदोलन की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। तय किया गया कि पहले चरण में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को नए कानून के प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक संगठन की मांग पहुंचाई जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


संगठन की एकजुटता और संकल्प

बैठक के दौरान अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के सभी सदस्यों ने संगठन की एकजुटता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। सभी ने यह संकल्प लिया कि शिक्षा के हित में वे किसी भी स्तर पर संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।
महासभा का मानना है कि जब तक सरकार इस कानून पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


 शिक्षा के भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की यह बैठक शिक्षा के भविष्य को लेकर समाज की गहरी चिंता को दर्शाती है। UGC के नए कानून के विरोध में लिया गया धरना-प्रदर्शन का निर्णय यह संदेश देता है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाज सजग और सक्रिय है।
महासभा ने सरकार से पुनः आग्रह किया है कि वह इस कानून को वापस ले या व्यापक विमर्श के बाद इसमें आवश्यक संशोधन करे, ताकि शिक्षा की स्वतंत्रता, गुणवत्ता और सामाजिक संतुलन सुरक्षित रह सके।

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