गंगा संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
हाजीपुर में ‘जलज सुदर्शन डॉल्फिन सफारी’ के तहत दो जलज सफारी नौकाओं का भव्य उद्घाटन
कोनहारा घाट से गंगा संरक्षण और आजीविका का नया संदेश
हाजीपुर (वैशाली) के ऐतिहासिक कोनहारा घाट पर गंगा नदी के संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जलज सुदर्शन डॉल्फिन सफारी परियोजना के अंतर्गत दो अत्याधुनिक जलज सफारी नौकाओं का उद्घाटन जिलाधिकारी वैशाली श्रीमती वर्षा सिंह द्वारा विधिवत रूप से किया गया। यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए बल्कि पर्यटन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
‘जलज’ परियोजना : केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल
यह कार्यक्रम भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की संयुक्त परियोजना ‘जलज’ के अंतर्गत आयोजित किया गया। ‘जलज’ परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी बेसिन क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदायों को जलीय जीवों के संरक्षण, नदी स्वच्छता और सतत आजीविका से जोड़ना है।
इस परियोजना के तहत गंगा नदी को केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में संरक्षित करने की सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है।
देशव्यापी उद्घाटन में हाजीपुर की विशेष भागीदारी
उल्लेखनीय है कि इसी दिन माननीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटील द्वारा देशभर में 25 नए जलज केंद्रों का ऑनलाइन उद्घाटन किया गया। इन 25 केंद्रों में हाजीपुर स्थित जलज केंद्र भी शामिल था। इस प्रकार, हाजीपुर को गंगा संरक्षण और डॉल्फिन सफारी के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ।
जिलाधिकारी वैशाली श्रीमती वर्षा सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में स्थानीय स्तर पर यह कार्यक्रम अत्यंत सफल और प्रेरणादायी रहा।
जलज सफारी : संरक्षण के साथ पर्यटन का संगम
जलज परियोजना के पाँच प्रमुख आयामों में से एक महत्वपूर्ण आयाम है जलज सफारी। इसके अंतर्गत गंगा नदी में पाई जाने वाली गंगा डॉल्फिन, कछुए, घड़ियाल एवं अन्य जलीय जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से देखने की व्यवस्था की गई है।
यह सफारी पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल, शोर-रहित और जलीय जीवों के अनुकूल तकनीक पर आधारित है, ताकि किसी भी प्रकार से जलीय जैव विविधता को नुकसान न पहुंचे।
स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका का नया द्वार
जलज परियोजना का सबसे सशक्त पक्ष यह है कि इसमें स्थानीय नाविकों, मछुआरों और युवाओं को सीधे तौर पर जोड़ा गया है। उन्हें प्रशिक्षण देकर गंगा प्रहरी, नाविक, गाइड एवं पर्यावरण मित्र के रूप में तैयार किया गया है।
इससे एक ओर जहां स्थानीय लोगों को सम्मानजनक और स्थायी रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर वे स्वयं गंगा और उसके जलीय जीवों के संरक्षक बन रहे हैं।
जिलाधिकारी वर्षा सिंह का प्रेरक संबोधन
मुख्य अतिथि जिलाधिकारी वैशाली श्रीमती वर्षा सिंह ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जलज परियोजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि—
“गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। जलज परियोजना गंगा संरक्षण को आजीविका से जोड़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।”
उन्होंने स्थानीय लोगों से गंगा की स्वच्छता बनाए रखने, जलीय जीवों की रक्षा करने तथा पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा को सुरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित होंगे।
गंगा डॉल्फिन संरक्षण को मिलेगा नया बल
गंगा डॉल्फिन, जो भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव है, आज भी कई खतरों का सामना कर रही है। जलज डॉल्फिन सफारी के माध्यम से लोगों में इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और अवैध शिकार, प्रदूषण व अनियंत्रित गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
यह पहल गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के साथ-साथ वैज्ञानिक अध्ययन और निगरानी में भी सहायक सिद्ध होगी।
प्रशासन, गंगा प्रहरी और समाज की सामूहिक भागीदारी
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कई प्रशासनिक और परियोजना से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
श्री सुशील कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद हाजीपुर
श्री तारिक रजा, विशेष कार्य पदाधिकारी
श्री मुनीश कुमार, जिला परियोजना पदाधिकारी, जिला गंगा समिति
नाविक गंगा प्रहरी विनोद साहनी, धनेश्वर, मुकेश, मनीष, गौरव, पंकज कुमार चौधरी
के साथ बड़ी संख्या में गंगा प्रहरी, नाविक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
हाजीपुर को मिलेगा पर्यटन के रूप में नया पहचान
जलज डॉल्फिन सफारी के शुरू होने से हाजीपुर और वैशाली जिले में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि हाजीपुर को इको-टूरिज्म हब के रूप में भी पहचान मिलेगी।
गंगा के भविष्य की मजबूत नींव
कोनहारा घाट से शुरू हुई जलज सुदर्शन डॉल्फिन सफारी केवल एक उद्घाटन कार्यक्रम नहीं, बल्कि गंगा संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जनभागीदारी की एक सशक्त मिसाल है। प्रशासन, केंद्र सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और स्थानीय समुदाय की साझेदारी से यह परियोजना आने वाले समय में गंगा नदी के पुनर्जीवन में अहम भूमिका निभाएगी।
यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि विकास और संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं, बस इसके लिए सही सोच और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
