Indian National Congress का ‘संगठन सृजन अभियान’ : बिहार से नई ऊर्जा का संचार,
प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने रखी विस्तृत रूपरेखा
AICC की प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने प्रेस वार्ता में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसका संगठन होता है। यदि संगठन मजबूत हो तो दल विपरीत परिस्थितियों में भी अंगद की तरह मजबूती से खड़ा रहता है। इसी सोच के साथ बिहार में ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत की गई है, जो 17 फरवरी 2026 से 1 मार्च 2026 तक चलेगा। 6 मार्च तक सभी पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट एआईसीसी को सौंपेंगे।
अहमदाबाद अधिवेशन के बाद नई पहल
डॉ. नायक ने बताया कि अहमदाबाद अधिवेशन के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक परिवर्तन की दिशा में यह अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य देश के हर राज्य और जिले में पारदर्शी, जवाबदेह और जनता से सीधे जुड़े संगठनात्मक ढांचे का निर्माण करना है।
इस प्रक्रिया की शुरुआत जिला कांग्रेस अध्यक्षों और जिला समितियों से की जा रही है। लक्ष्य है कि संगठन को नीचे से ऊपर तक पुनर्गठित कर उसे अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाया जाए।
गांधी के विचारों से प्रेरित अभियान
डॉ. नायक ने कहा कि महात्मा गांधी का मानना था कि राजनीति का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचना है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के माध्यम से लगभग 4000 किलोमीटर की पदयात्रा की।
उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक लोगों से सीधा संवाद किया, उनके दुख-दर्द को समझा और देश को “मोहब्बत के फेविकोल” से जोड़ने का संदेश दिया। डॉ. नायक ने कहा कि यह राजनीति बंद कमरों की नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर संवाद की राजनीति है।
खुले दरवाजों से होगा नेतृत्व का चयन
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के हवाले से उन्होंने कहा कि अब संगठन में पदों का निर्णय बंद कमरों में नहीं होगा। ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत कार्यकर्ताओं, क्षेत्रीय नेताओं और संघर्ष के साथियों से रायशुमारी कर नेतृत्व का चयन किया जाएगा।
यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक और सहभागी होगी, जिससे जमीनी स्तर पर मजबूत नेतृत्व उभर सके।
व्यापक परामर्श की जिम्मेदारी
अभियान के तहत एआईसीसी पर्यवेक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों, फ्रंटल संगठनों—जैसे NSUI, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस और सेवा दल—सहित सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से व्यापक परामर्श करें।
इस संवाद प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे नेतृत्व की तलाश की जाएगी जो केवल प्रतीकात्मक न होकर सक्रिय, प्रतिबद्ध और दूरदर्शी हो।
जिलाध्यक्षों की नई भूमिका और जवाबदेही
डॉ. नायक ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिला कांग्रेस समितियों को मजबूत बनाना है। जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, सशक्तिकरण और जवाबदेही की प्रणाली को नया रूप दिया जा रहा है।
कांग्रेस ऐसे जिलाध्यक्ष चाहती है जो मानवतावादी, समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और न्यायप्रिय विचारधारा के प्रति निष्ठावान हों। वे बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त करने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करें।
सक्रिय जिलाध्यक्ष जिनका कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है, वे भी आवेदन दे सकते हैं। वर्तमान जिलाध्यक्ष जो पद पर बने रहना चाहते हैं, उन्हें भी आवेदन करना होगा।
विकेंद्रीकरण और सामाजिक न्याय पर जोर
डॉ. नायक ने कहा कि जब राहुल गांधी संविधान हाथ में लेकर समता, समानता और न्याय की बात करते हैं या जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाते हैं, तो उसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को उसका अधिकार दिलाना है।
‘संगठन सृजन अभियान’ में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पिछड़े, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिलाएँ, युवा और वंचित वर्गों को बराबरी से स्थान मिले। यह सत्ता के विकेंद्रीकरण की दिशा में ठोस कदम है।
भाजपा सरकार पर तीखा हमला
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. नायक ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वादों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर है।
उन्होंने सवाल उठाया कि न दो करोड़ नौकरियाँ मिलीं, न 15 लाख रुपये खातों में आए, न पेट्रोल-डीजल 40 रुपये हुए, न बुलेट ट्रेन चली, न 100 स्मार्ट सिटी बनीं। बिहार को न विशेष राज्य का दर्जा मिला और न ही घोषित पैकेज का लाभ।
उन्होंने कहा कि यही फर्क है INDIA गठबंधन और NDA के बीच।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से अपील
डॉ. नायक ने मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए आग्रह किया कि वे इस अभियान की जानकारी जनता तक पहुँचाएँ। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र के शुभचिंतकों से भी अपील की कि वे ‘संगठन सृजन अभियान’ में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
स्थानीय नेतृत्व की मौजूदगी
प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष महेश प्रसाद राय, कार्यकारी जिलाधिकारी डॉ. अक्षय शुक्ला, युवा कांग्रेस नेता बृज राय, पूर्व जिलाध्यक्ष रंधीर पासवान, संजय मिश्रा, मो. सद्दाम, उत्तम यादव, सुनील सिंह, मनोज सिंह सहित जिले के कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
निष्कर्ष: संगठन से ही सशक्त होगी कांग्रेस
‘संगठन सृजन अभियान’ केवल पदों के पुनर्गठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस को जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करने की पहल है। इसका उद्देश्य है—पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकार को केंद्र में रखकर संगठन का पुनर्निर्माण।
यदि यह अभियान सफल होता है तो कांग्रेस बिहार में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत और सशक्त विकल्प के रूप में उभर सकती है।
