वैशाली में ई-शिक्षा कोष एप में बड़ा फर्जीवाड़ा घर बैठे बन रही थी शिक्षिका की हाजिरी, RTI खुलासे से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप,

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वैशाली में ई-शिक्षा कोष एप में बड़ा फर्जीवाड़ा

घर बैठे बन रही थी शिक्षिका की हाजिरी, RTI खुलासे से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप




बिहार सरकार सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार डिजिटल तकनीकों का सहारा ले रही है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और विद्यालयों की निगरानी मजबूत करने के लिए “ई-शिक्षा कोष एप” लागू किया गया था। इस एप के माध्यम से शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंच रहे हैं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।

लेकिन वैशाली जिले से सामने आए एक मामले ने इस पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता और मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिदुपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय कंचनपुर में पदस्थापित एक शिक्षिका पर आरोप है कि वे घर बैठे ही ई-शिक्षा कोष एप के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रही थीं और बाद में विद्यालय पहुंचकर मैनुअल रजिस्टर में हस्ताक्षर करती थीं। इस कथित फर्जीवाड़े का खुलासा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से हुआ है।

RTI दस्तावेजों में हुआ बड़ा खुलासा

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों में ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यालय के मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर के समय में भारी अंतर पाया गया। आरोप है कि शिक्षिका अर्चना कुमारी सुबह घर से ही एप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कर देती थीं, जबकि विद्यालय पहुंचने का समय काफी बाद का था।

इतना ही नहीं, RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार एप पर दर्ज लोकेशन भी विद्यालय की बजाय शिक्षिका के घर की दिखाई गई है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि सरकारी निगरानी प्रणाली को तकनीकी तरीके से धोखा दिया जा रहा था।

यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। विभागीय अधिकारियों ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा है कि मामले की जांच कर दोषियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

ई-शिक्षा कोष एप को इसलिए लागू किया गया था ताकि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बने। लेकिन यदि इसी एप का दुरुपयोग होने लगे, तो सरकार की मंशा पर पानी फिर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाएं बढ़ती हैं, तो इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि विद्यार्थियों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों के सरकारी विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी, संसाधनों के अभाव और कमजोर मॉनिटरिंग जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचेंगे, तो बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा।

तकनीकी खामियों का भी उठ रहा मुद्दा

इस मामले के सामने आने के बाद अब ई-शिक्षा कोष एप की तकनीकी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि एप में लोकेशन ट्रैकिंग की सुविधा है, तो फिर गलत लोकेशन से उपस्थिति दर्ज कैसे हो गई?

कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस एप में और मजबूत सुरक्षा फीचर्स जोड़ने चाहिए, जैसे कि लाइव फेस वेरिफिकेशन, स्कूल परिसर में ही उपस्थिति दर्ज करने की बाध्यता और GPS आधारित ऑटोमेटिक लोकेशन लॉक सिस्टम।

यदि तकनीकी सुरक्षा मजबूत नहीं की गई, तो भविष्य में इस तरह के और भी मामले सामने आ सकते हैं।

ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा असर

वैशाली सहित बिहार के कई जिलों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति पहले से चिंता का विषय बनी हुई है। अभिभावकों का आरोप रहता है कि कई शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र पूरी तरह सरकारी विद्यालयों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में शिक्षकों की लापरवाही सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ मानी जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई शिक्षक स्कूल आए बिना ही अपनी उपस्थिति दर्ज कर लेता है, तो यह सरकारी व्यवस्था के साथ धोखा है। उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में कोई अन्य शिक्षक इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न करे।

विभागीय जांच पर टिकी निगाहें

इस पूरे मामले में अब शिक्षा विभाग की जांच पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षिका के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।

हालांकि, इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि केवल तकनीक लागू कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी नियमित मॉनिटरिंग और सत्यापन भी बेहद जरूरी है।

सरकार के लिए बड़ी चुनौती

बिहार सरकार शिक्षा सुधार के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। डिजिटल उपस्थिति प्रणाली भी उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। लेकिन वैशाली का यह मामला सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

यदि तकनीकी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो शिक्षा सुधार की योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग न हो और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

वैशाली जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय कंचनपुर में सामने आया ई-शिक्षा कोष एप फर्जीवाड़ा केवल एक विद्यालय का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

RTI से हुए इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक का सही इस्तेमाल तभी संभव है, जब उसकी निगरानी मजबूत हो। अब लोगों की नजर विभागीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है, तो इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार का संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकेगी।


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